बुधवार, 2 अगस्त 2017

मेरा जालोर

भौगौलिक स्थिति


जालोर जिला 24°37 से 25°49 उत्तरी अक्षांश एवं 71°11 से 73°05 पूर्वी देशान्तर के बीच स्थित हैं।
सुवर्णगिरि के नाम से प्रसिद्ध महर्षि जाबालि की तपोभूमि को जाबालीपुर के नाम से जाना जाता था। जालोर का भूभाग गोडवाड़ के अंतर्गत था। जालोर राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित 12 जिलों में आता है।
व्हेल मछली की आकृति के समान जोधपुर संभाग में स्थित जालोर 10640 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ हैं।
वर्तमान में इसे ग्रेनाइट शहर के नाम से जाना जाता हैं। जालोर शब्द दो शब्दों जाल + लौर से बना है। जाल यानी जाल का पेड़ जो इस क्षेत्र में बहुतायत में पाया जाता हैं तथा लौर यानी सीमा अर्थात जालोर का शाब्दिक अर्थ हुआ जाल के पेड़ों की सीमा वाला क्षेत्र

पड़ौसी जिले - जालोर की सीमा बाड़मेर , पाली , सिरोही तथा गुजरात राज्य के बनासकांठा जिले से लगती हैं।

जिले की जनसंख्या

कुल जनसंख्या 1828730
पुरुष जनसंख्या 936634
स्त्री जनसंख्या 893096
ग्रामीण जनसंख्या 91.7
लिंगानुपात 952
शहरी 8.3
दशकीय वृद्धि दर 26.2
0 से 6 वर्ष की जनसंख्या 316455
जनसंख्या प्रतिशत 17.30
शिशु लिंगानुपात 895
जनसंख्या घनत्व 172
कुल साक्षरता दर 54.9
पुरुष साक्षरता दर 70.7
महिला साक्षरता दर 38.5
अनुसूचित जाति जनसंख्या % 19.5
अनुसूचित जनजाति जनसंख्या % 9.8

प्रशासनिक इकाइयाँ

तहसील :- Jalore जिले में 9 तहसील हैं।
जालोर
आहोर
भीनमाल
बागोड़ा
रानीवाड़ा
सांचौर
चितलवाना
सायला
भाद्राजून

उपतहसील:- 2 उपतहसील है।
भाद्राजून
चितलवाना

उपखंड:- 9 उपखंड हैं।

पंचायत समितियाँ:-8 पंचायत समितियाँ हैं।
जालोर
आहोर
भीनमाल
रानीवाड़ा
सांचौर
चितलवाना
सायला
जसवंतपुरा

ग्राम पंचायत - 274 हैं।

मन्दिर एवं दर्शनिय स्थल
जालोर दुर्ग :-
जालोर दुर्ग को जाबालीपुर , जालंधर दुर्ग , काचंनगिरी दुर्ग ,सोनगिरि , सुवर्णगिरि , जलालाबाद दुर्ग तथा जालोर दुर्ग के नाम से जाना जाता हैं
गौरीशंकर हीरानंद ओझा के अनुसार इसका निर्माण परमारों द्वारा हुआ बताया है जबकि दशरथ शर्मा के अनुसार प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम ने सुकड़ी नदी के किनारे इस किले का निर्माण करवाया गया।
10वीं शताब्दी में धारावर्ष नामक परमार शासक ने इस दुर्ग का पुनः निर्माण करवाया।
कान्हड़देव सोनगरा और अलाउद्दीन खिलजी के मध्य 1311 ई. में युद्ध हुआ जिसमें खिलजी की जीत हुई और किले में अपनी आन बान की रक्षा के लिए राजपूत जौहर की ज्वाला में कूद पढ़ें।
इस किले में अलाउद्दीन खिलजी की मस्जिद ; जिसे तोप मस्जिद भी कहा जाता हैं , चामुंड माता का मंदिर , परमार कालीन कीर्तिस्तम्भ भी स्थित हैं।

मलिक शाह पीर की दरगाह - धार्मिक एकता एवं हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक उर्स जालोर दुर्ग में स्थित इस मस्जिद में भरता हैं।

मोदरां माताजी - जालोर के सोनगरा चौहानों की कुलदेवी मोदरां माताजी थी। नवरात्र में इस मंदिर में विशाल मेले का आयोजन होता हैं। मन्दिर में स्थापित मूर्ति लगभग एक हजार वर्ष पुरानी हैं।

आपेश्वर महादेव - रामसीन गाँव मे ये शिव मंदिर गुर्जर प्रतिहार कालीन है । इस शिव मंदिर की एक विशेषता हैं कि इस मंदिर में शिवलिंग की जगह शिव की मूर्ति है। मन्दिर का पुजारी कश्यप गोत्रीय रावल ब्राह्मण हैं।

सिरे मन्दिर - यह स्थान जालंधरनाथ की तपोभूमि है , जिनके नाम पर जालोर को जालन्धर कहा जाता था।

सेवाड़िया पशु मेला - ये पशुमेला रानीवाड़ा के निकट सेवाड़िया गांव में आपेश्वर महादेव के मंदिर के पास  चैत्र सुदी एकादशी से पूर्णिमा तक भरता हैं।

त्रिवेणी संगम - रानीवाड़ा से 10 कि.मी. दूर सुरजवाड़ा गांव में बारहमासी सुकल नदी बहती है। सुरजवाड़ा गांव में तीन नदियों का संगम होता हैं जहां पर महादेवजी के प्राचीन मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद हैं ।

सुंधा पर्वत - जसवंतपुरा पहाड़ियों की सबसे ऊंची चोटी को सुंधा पर्वत के नाम से जाना जाता है। इस पहाड़ी पर चामुंडा माताजी का मंदिर हैं जहां पर राजस्थान , गुजरात , महाराष्ट्र तथा आस पास के राज्यों से वर्षपर्यंत श्रद्धालु आते रहते है। राजस्थान का पहला रोपवे 20 दिसम्बर , 2006 को सुंधा पर्वत पर ही प्रारम्भ हुआ।

भीनमाल - महाकवि माघ की जन्मभूमि । प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग भीनमाल भी आया था।

सांचौर - प्राचीन समय मे सत्यपुर नाम से जाना जाता था। सांचौर में पांच नदियाँ बहने के कारण इसे राजस्थान का पंजाब कहा जाता हैं। राजस्थान का सबसे लंबा NH 15 इसी नगर से होकर गुजरता हैं। नर्मदा नहर पर बना नर्मदेश्वर धाम सांचौर के सीलु गांव में है। सांचौर में बाबा रघुनाथपुरी पशुमेला चैत्र माह में भरता हैं।

तल्लीनाथ जी -ये वीरमदेव के पुत्र थे इनका वास्तविक नाम गांगदेव राठौड़ था। इनके गुरु जालन्धर नाथ थे। जालोर जिले के पांचोटा गाँव मे पंचमुखी पहाड़ी के बीच घोड़े पर सवार तल्लीनाथजी की मूर्ति स्थापित है। व्यक्ति या पशु को जहरीले कीड़े के काटने या बीमार होने पर इनके नाम का डोरा बांधते हैं। ये राजस्थान के एकमात्र लोकदेवता है जिन्होंने वृक्ष काटने पर रोक लगाई।

वीर फत्ताजी - फत्ताजी का जन्म जालोर के सांथू गाँव में गज्जारणी परिवार में हुआ। मुख्य पूजास्थल सांथू गांव में है जहाँ पर भादो मास की शुक्ल नवमी को मेला भरता हैं।

विशेष तथ्य

1.भारत का 40 प्रतिशत इसबगोल (घोड़ा जीरा ) जालोर जिले में पैदा होता है।
2.सांचौर में राज्य का पहला गौमूत्र बैंक हैं
3.राष्ट्रीय कामधेनु विश्वविद्यालय सांचौर के पथमेड़ा में स्थित है।
4.भारत व राजस्थान का पहला एड्स (HIV) रोगियों का स्वयं का अस्पताल जालोर में है।
5.जालोर जिले औद्योगिक दृष्टि से सर्वाधिक पिछड़ा जिला है।
6.न्यूनतम महिला साक्षरता प्रतिशत 38.5% वाला जिला।
7.न्यूनतम नगरीय साक्षरता  दर वाला जिला।
8.न्यूनतम साक्षरता वाला जिला 54.9 प्रतिशत
9.इसबगोल मंडी भीनमाल में स्थित है।
10.सोहिनी उद्यान भीनमाल में है।
11.जालोर में गुलाबी रंग का संगमरमर निकलता है जिसे ग्रेनाइट कहा जाता है। इसी के कारण जालोर को ग्रेनाइट नगरी कहा जाता है।
12.कांकरेज गाय से मिलती जुलती सांचोरी गौवंश  का प्रजनन केंद्र सांचौर में है।
13.ढोल नृत्य जालोर का प्रसिद्ध है।
14.सूती खैसला लेटा गांव का तथा भीनमाल की जूतियाँ प्रसिद्ध हैं।
15.पद्मनाभ कृत कान्हड़देव प्रबन्ध में अल्लाउद्दीन की जालोर विजय का वर्णन है।
16.उद्योतन सूरी कृत कुवलयमाला में भी जालोर का वर्णन है।
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17.जालोर में एलाना और भीनमाल प्राचीन सभ्यता स्थल हैं।
17.भीनमाल निवासी संस्कृत के प्रसिद्ध कवि माघ , जिन्हें राजस्थान का कालिदास कहा जाता है का प्रसिद्ध ग्रंथ शिशुपालवध है।
18.पीर की जाल (सांचौर ) में हजरत मख्दुन की दरगाह तथा अब्बनशाह अल्लेहिर्रहमा की दरगाह सांचौर में स्थित हैं।
19.जालोर में मानसिंह महल है।
20.सुकड़ी जिलें की मुख्य नदी है। जालोर के बांकली गाँव में इस नदी पर बांकली बांध बना हुआ है।
21.जिले में लूनी , खारी , सुकल , सुकड़ी , जवाई , सागी नदियाँ बहती हैं।
22.जिला अर्द्धशुष्क जलवायु प्रदेश में आता है।
23.भूरी रेतीली मिट्टी जिसे मरुस्थलीय मिट्टी कहा जाता हैं , पायी जाती है।
24. जालोर में नगरपरिषद तथा भीनमाल , सांचौर में नगरपालिका हैं।
25.राजस्थान की सबसे बड़ी दूध डेयरी सरस डेयरी रानीवाड़ा में है।
8. नर्मदा नहर के पानी का राजस्थान में 27 मार्च , 2008 को सीलू गाँव मे प्रवेश हुआ।
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